पोंगल तमिलनाडु राज्य का फसलों का त्योहार है, जो 13 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता है। हालाँकि मूल त्योहार 14 जनवरी से ही शुरू होता है, जिसे पेरम पोंगल कहा जाता है। यह चार दिनों तक चलता है। पोंगल के शुरू होने के पहले रंगोली बनाई जाती है जो चावल के आटे से बनाई जाती है यह तमिल परिवारों के दरवाजे के बाहर फर्श पर बनाई जाती है। लोग अच्छी फसल के लिए ईश्वर, पृथ्वी और अपने पशुओं को धन्यवाद देते हैं तथा अगले साल की अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं। पोंगल त्योहार का नाम वास्तव में एक मिठाई पर पड़ा है। पोंगल उत्सव में गीत विशेष महत्व रखते हैं। लोग इकट्ठा होकर गीत गाते हैं। (क) पोंगल किस राज्य का त्योहार है ? कर्नाटक केरल तमिलनाडु गुजरात
Question
पोंगल तमिलनाडु राज्य का फसलों का त्योहार है, जो 13 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता है। हालाँकि मूल त्योहार 14 जनवरी से ही शुरू होता है, जिसे पेरम पोंगल कहा जाता है। यह चार दिनों तक चलता है। पोंगल के शुरू होने के पहले रंगोली बनाई जाती है जो चावल के आटे से बनाई जाती है यह तमिल परिवारों के दरवाजे के बाहर फर्श पर बनाई जाती है। लोग अच्छी फसल के लिए ईश्वर, पृथ्वी और अपने पशुओं को धन्यवाद देते हैं तथा अगले साल की अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं। पोंगल त्योहार का नाम वास्तव में एक मिठाई पर पड़ा है। पोंगल उत्सव में गीत विशेष महत्व रखते हैं। लोग इकट्ठा होकर गीत गाते हैं। (क) पोंगल किस राज्य का त्योहार है ? कर्नाटक केरल तमिलनाडु गुजरात
Solution
पोंगल तमिलनाडु राज्य का त्योहार है।
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राजाचार्यः मार्गे गच्छन् आसीत् । समीपस्थस्य जीर्णकुटिरस्य पुरतः काचित् माता पुत्रं निर्दयंताडयन्ती तेन दृष्टा । बालकः उच्चैः रोदिति स्म । तथापि माता तं पुनः ताडयति स्म । एतत्दुष्टुम् अशक्तः राजाचार्यः वेगेन अग्रे गत्वा तां महिलां पृष्टवान् – “अम्ब! अलं ताडनेन ।किमर्थम् एषः एवं ताडयते? कः अपराधः कृतः एतेन? माता पुनरपि एकं प्रहारं पुत्राय समर्प्यराजाचार्यम् उक्तवती – “महामूर्खः एषः कुक्कुटकंडोलस्य द्वारम् उद्घाटितवान् अस्ति । मयासङ्गृहीतः सर्वे कुक्कुटा पलायिता सन्ति…. ।” तां सांत्वयन् उक्तवान् राजाचार्यः – “एतावत्एव खलु? एतदर्थम् एतावत् कोपः किमर्थम् ? इदानीं निर्गताः कुक्कुटाः सायं सूर्यास्तमयेप्रत्यागच्छेयुः एव।” इति ।1. मार्गे कः गच्छन् आसीत् ?*1 pointराजाचार्यःमाताकुक्कुटाःमहिलाः2. कः पुत्रं ताडयति?*1 pointमातापिताभगिनीमहिला3. “ताडयति स्म” इति क्रियापदस्य कर्तुपदं किम् ?*1 pointपुत्रःराजचार्यःमाताबालकः4. “बुद्धिमानः” इति पदस्य विलोमपदं अनुच्छेदानुसारेण किम् ?*1 pointमहामूर्खःकोपःखलुसायं
राम को कुटिया से निकलते देखकर मायावी हिरण कुलाचें भरने लगा। राम को बहुत छकाया। झाड़ियों में लुकता-छिपता-भागता वह राम को कुटिया से बहुत दूर ले गया। राम जब भी उसे पकड़ने का प्रयास करते, वह भागकर और दूर चला जाता। हिरण चालाक था। वह इतनी दूर कभी नहीं जाता था कि पहुँच से बाहर लगे। राम के सारे प्रयास विफल हुए। वे हिरण को पकड़ नहीं पाए। उन्होंने उसे जीवित पकड़ने का विचार त्याग दिया। धनुष उठाया। निशाना साधा और एक बाण उस पर छोड़ दिया। बाण लगते ही हिरण गिर पड़ा। धरती पर गिरते ही मारीच अपने असली रूप में आ गया। मारीच ने माया से केवल अपना रूप नहीं बदला था। आवाज़ भी बदल ली थी।अपनी आवाज़ राम जैसी बना ली थी। धरती पर पड़े हुए वह ज़ोर से चिल्लाया, हा सीते! हा लक्ष्मण! ̧ ध्वनि ऐसी थी जैसे बाण राम को लगा हो।
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