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राम को कुटिया से निकलते देखकर मायावी हिरण कुलाचें भरने लगा। राम को बहुत छकाया। झाड़ियों में लुकता-छिपता-भागता वह राम को कुटिया से बहुत दूर ले गया। राम जब भी उसे पकड़ने का प्रयास करते, वह भागकर और दूर चला जाता। हिरण चालाक था। वह इतनी दूर कभी नहीं जाता था कि पहुँच से बाहर लगे। राम के सारे प्रयास विफल हुए। वे हिरण को पकड़ नहीं पाए। उन्होंने उसे जीवित पकड़ने का विचार त्याग दिया। धनुष उठाया। निशाना साधा और एक बाण उस पर छोड़ दिया। बाण लगते ही हिरण गिर पड़ा। धरती पर गिरते ही मारीच अपने असली रूप में आ गया। मारीच ने माया से केवल अपना रूप नहीं बदला था। आवाज़ भी बदल ली थी।अपनी आवाज़ राम जैसी बना ली थी। धरती पर पड़े हुए वह ज़ोर से चिल्लाया, हा  सीते! हा लक्ष्मण! ̧ ध्वनि ऐसी थी जैसे बाण राम को लगा हो।

Question

राम को कुटिया से निकलते देखकर मायावी हिरण कुलाचें भरने लगा। राम को बहुत छकाया। झाड़ियों में लुकता-छिपता-भागता वह राम को कुटिया से बहुत दूर ले गया। राम जब भी उसे पकड़ने का प्रयास करते, वह भागकर और दूर चला जाता। हिरण चालाक था। वह इतनी दूर कभी नहीं जाता था कि पहुँच से बाहर लगे। राम के सारे प्रयास विफल हुए। वे हिरण को पकड़ नहीं पाए। उन्होंने उसे जीवित पकड़ने का विचार त्याग दिया। धनुष उठाया। निशाना साधा और एक बाण उस पर छोड़ दिया। बाण लगते ही हिरण गिर पड़ा। धरती पर गिरते ही मारीच अपने असली रूप में आ गया। मारीच ने माया से केवल अपना रूप नहीं बदला था। आवाज़ भी बदल ली थी।अपनी आवाज़ राम जैसी बना ली थी। धरती पर पड़े हुए वह ज़ोर से चिल्लाया, हा  सीते! हा लक्ष्मण! ̧ ध्वनि ऐसी थी जैसे बाण राम को लगा हो।

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Solution

यह कथा रामायण से ली गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे मायावी राक्षस मारीच ने हिरण का रूप धारण करके राम को उनकी कुटिया से दूर ले गया। मारीच का यह योजना थी कि वह सीता को अकेला छोड़ना चाहता था ताकि रावण उसे अपहरण कर सके। जब राम ने समझा कि वह हिरण को जीवित पकड़ नहीं सकता, तो उन्होंने उस पर बाण छोड़ दिया। बाण लगते ही मारीच अपने असली रूप में वापस आ गया और उसने राम की आवाज़ में चिल्लाकर सीता और लक्ष्मण को बुलाया। इसका उद्देश्य था कि सीता और लक्ष्मण को यह लगे कि राम को कुछ हो गया है।

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