भावार्थ लिखिए - गुण बड़े एक से एक प्रखर,हैं छिपे मानवों के भीतर,मेंहदी में जैसी लाली हो,वर्तिका-बीच उजियाली हो,बत्ती जो नहीं जलाता है,रोशनी नहीं वह पाता है।[4]
Question
भावार्थ लिखिए - गुण बड़े एक से एक प्रखर,हैं छिपे मानवों के भीतर,मेंहदी में जैसी लाली हो,वर्तिका-बीच उजियाली हो,बत्ती जो नहीं जलाता है,रोशनी नहीं वह पाता है।[4]
Solution
इस कविता का भावार्थ यह है कि हर व्यक्ति के अंदर कुछ गुण छिपे होते हैं, जो उसके व्यक्तित्व को और अधिक प्रखर और उज्ज्वल बनाते हैं। यह गुण मेहंदी की तरह होते हैं, जो अपनी लालिमा से हाथों को सुंदर बनाती हैं, या वर्तिका के बीच की उजियाली जो अंधकार को दूर करती है। लेकिन जो व्यक्ति अपने इन गुणों को पहचानकर उन्हें जीवन में उपयोग नहीं करता, वह उनकी चमक को कभी नहीं देख पाता, ठीक उसी प्रकार जैसे बत्ती जलने के बिना रोशनी नहीं दे सकती।
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