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आप सुनील शर्मा / सुनीता शर्मा हैं और बाल विकास विद्यालय के विद्यार्थी सचिव हैं । विजय दिवस के अवसर पर विद्यालय में होने वाली अंतरविद्यालयी निबंध प्रतियोगिता जानकारी देते हुए लगभग 80 शब्दों में सचना तैयार कीजिए ।

Question

आप सुनील शर्मा / सुनीता शर्मा हैं और बाल विकास विद्यालय के विद्यार्थी सचिव हैं । विजय दिवस के अवसर पर विद्यालय में होने वाली अंतरविद्यालयी निबंध प्रतियोगिता जानकारी देते हुए लगभग 80 शब्दों में सचना तैयार कीजिए ।

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Solution

सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि विजय दिवस के अवसर पर हमारे विद्यालय, बाल विकास विद्यालय में अंतरविद्यालयी निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। यह एक अद्वितीय अवसर है अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का। हम आपकी भागीदारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। धन्यवाद!

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रामकथा विशेष रूप से भारतीय साहित्य का अभिन्न हिस्सा है। वाल्मीकि रामायण में रामकथा ने धार्मिक, सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से जीवन के मूल्यों को सर्वोत्तम रूप से प्रस्तुत किया है। श्रीराम की अद्वितीय कथा ने सदियों से लोगों को एक साथ जोड़ा है और उन्हें साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रेरित किया है।रामकथा का महत्व किस क्षेत्र में है?*1 pointराजनीतिधर्म, समाज और नैतिकताविज्ञानखेल-कूदकिस रामायण में रामकथा धार्मिक, सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत की गई है? *1 pointतुलसीदास रामायणवाल्मीकि रामायणकृष्णकाव्यभागवत पुराणश्रीराम की  कथा ने लोगों को किस दृष्टिकोण से जोड़ा है?*1 pointखेल-कूदसाहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिकराजनीतिविज्ञानरामकथा ने किस रूप में जीवन के मूल्यों को प्रस्तुत किया है?*1 pointसिर्फ सामाजिक दृष्टिकोण सेसर्वोत्तम रूप से धार्मिक, सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण सेकेवल विज्ञानिक दृष्टिकोण सेकेवल साहित्यिक दृष्टिकोण से

समाजे यथा पुत्रस्य अधिकारः तथा कन्यायाः अपि। उभयोः पठने समानः अधिकारः वर्तते। अतः परिवारे पुत्रः पाठनीयः, पुत्री अपि समानरूपेण पाठनीया। पठनेन ज्ञानं विकसितं भवति। अनेन किम् उचितं किं च अनुचितं तस्यबोधः भवति। नारी एव समाजं निर्माति। सा ब्रह्मा इव स्रष्टा अस्ति। सा जननी भवति। सा पुत्रं पुत्रीं च पाठयति। यदि सा शिक्षिता न भवति तदा सा पाठयितुं योग्या न भवति। गृहे अनेकाः समस्याः भवन्ति। ताः समस्याः दूरं कर्तुं दक्षतायाः आवश्यकता भवति। एका पठिता नारी एव समस्यां समाधातुम् अर्हति। समाजे यदि अन्यायं भवति, तदा शिक्षिता नारी एव तस्य समाधानं कर्तुं प्रभवति। वित्तकोषे अर्थस्य आदानस्य प्रदानस्य समये अपि प्रयोगज्ञानस्य आवश्यकता भवति। चिकित्सालये अपि आपत्काले औषधप्रदाने, चिकित्सकेन सह परामर्शकाले च एटीएम्- इत्यतः धनग्रहणसमये सा सहायतां करोति।5) ‘‘स्त्री’’ - इत्यर्थे किं पर्यायपदम् अत्र प्रयुक्तम्?*1 pointशिशुःनारीजनःपरिवारः6) पठनेन किं विकसितं भवति?*1 pointज्ञानंअधिकारःमित्राणिआयुः7)  कुत्र अनेकाः समस्याः भवन्ति?*1 pointग्रामेविद्यालयेगृहेनगरे8. ‘‘पठिता’’ - इत्यस्य विशेष्यपदं किम्?*1 pointशिक्षितापुत्रीमातानारी

आ रही रवि की सवारीनव-किरण का रथ सजा है,कलि-कुसुम से पथ सजा है,बादलों-से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाक धारी।आ रही रवि की सवारी।विहग, बंदी और चारण,गा रही है कीर्ति-गायन,छोड़कर मैदान भागी, तारकों की फ़ौज सारी।आ रही रवि की सवारी।चाहता, उछलूं विजय कह,पर ठिठकता देखकर यह -रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी।आ रही रवि की सवारी।

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. किसी भी क्रिया को पूरी करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य में दिखाई पडते हैं; जैसे – “वह हाथों से शिकार को जकड़ लेती थी।”जकड़ना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति (वह) जकड़नेवाला हो, कोई वस्तु (शिकार) हो जिसे जकड़ा जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों; जैसे – कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं।

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